Posted by admin on 2025-03-18 19:51:02 |
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जहाँ कभी दंगे नहीं हुए, जहाँ बाबा साहब अंबेडकर की दीक्षाभूमि है उस नागपुर में भी दंगे हो ही गए।
1707 में औरंगज़ेब मरा और एक साधारण सी क़ब्र बनी उसकी। 2025 में लोगों को याद आया कि पौने 13 रुपये में बनी वह क़ब्र देश के लिए खतरा है।
ठीक तब जब बेरोज़गारी चरम पर है, महाराष्ट्र में एक शिक्षक ने 18 साल से वेतन न मिलने के बाद अपनी जान दी है, एक किसान ने क़र्ज़ में डूबकर और खरबपतियों के अरबों के क़र्ज़ माफ़ हो रहे हैं- हिन्दू और मुसलमान दोनों को गुस्सा आया तो क़ब्र पर, ज़िंदा लोगों के लाश बनते जाने का और सबूत क्या होगा?
जो देश वर्तमान और भविष्य को छोड़कर इतिहास में जीने-मरने लगता है, वह अपने नागरिकों की तबाही की इबारत लिख रहा होता है।